भारतीय जनता पार्टी के संगठन पर्व कार्यक्रम के तहत मंडलों से लगाकर प्रदेश अध्यक्ष तक के चुनाव की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है, आगामी दिनों में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है ऐसे में राजनीतिक हलकों में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा कौन?
क्या जेपी नड्डा की ताजपोशी से फिर से होगी या फिर किसी पहले रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी या फिर हमेशा की तरह चौंकाने वाला कोई नाम होगा?
भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर भारत से होगा या फिर दक्षिण भारत से या फिर भारतीय जनता पार्टी पूर्व और पूर्वोत्तर की तरफ आगे बढ़ेगी?
भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद का बनेगा या फिर नरेंद्र मोदी की सहमति ही पर्याप्त होगी?
सवाल जितने ज्यादा है उतने ही ज्यादा नाम चर्चा में है, नाम की फेहरिस्त इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई और उसके पास विकल्पों की भरमार है,क्योंकि यहां परिवार की मोहर नहीं ना ही परिक्रमा के आधार पर अध्यक्ष का चुनाव होता है यहां तय करने के लिए बहुत सारे मापदंड है जिन पर आपको खरा उतरना होता है।
मूल रूप से देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी में संघात्मक जिम्मेदारी उसे व्यक्ति को दी जाती है जो वैचारिक रूप से मजबूत हो और संगठन का व्यक्ति । वैचारिक रूप से मजबूत अर्थात 100 साल पहले जिस संकल्प को लेकर एक विचार यात्रा प्रारंभ हुई थी उस के प्रति मनसा वाचा कर्मणा प्रतिबद्धता। यही कारण है कि आज तक जितने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे सब इसी पृष्ठभूमि के लोग थे और भाजपा को समझने वाले इतना जरुर जानते हैं कि इस विचार यात्रा से इतर कोई भी व्यक्ति भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारी पर नहीं रह सकता।
अब बात करते हैं उन नाम की जिनकी संभावनाओं पर सर्वाधिक चर्चाएं भाजपा के संगठन के गलियारों में होती है।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी कर्नाटक से आते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीकी माने जाते हैं। उनके नाम पर चर्चा है पर गंभीरता से विचार नहीं है।
श्रीमती वसुंधरा राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है। इनके नाम पर मीडिया में खूब चर्चा है, इनके समर्थकों की इच्छा भी है, महिला नेतृत्व के रूप में बड़ा नाम है।
वी श्रीनिवासन तमिलनाडु से आती हैं 1993 से जुडी हैं वर्तमान में भारतीय महिला जनता पार्टी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं तमिलनाडु से विधायक हैं परंतु उनके सामने भाषाई दिक्कत है जिसके कारण उनके नाम पर मोहर लगने की संभावना कम है।
केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, पिछड़ा वर्ग का भारतीय जनता पार्टी में बड़ा चेहरा है। विश्व हिंदू परिषद से भाजपा में आए हैं परंतु उत्तर प्रदेश के सत्ता समीकरण को देखते हुए उनके नाम पर भी मोहर लगने की संभावनाएं नहीं है।
बांदी संजय कुमार, तेलंगाना के पूर्व अध्यक्ष हैं उनकी जुझारू छवि है केंद्र में मंत्री हैं । संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं, परंतु सबको साथ लेकर चलने में उनकी कुशलता पर सवाल है इसी के चलते तेलंगाना चुनाव से पूर्व उन्हें हटाया गया था। जिसका नुकसान भी भारतीय जनता पार्टी को जनता के बीच हुआ,परंतु संगठन में सबको साथ लेकर चलने की कार्य प्रणाली वे विकसित नहीं कर पाए।
मनोज सिन्हा जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल है, कुशल प्रशासक माने जाते हैं और पूर्व में मोदी सरकार में मंत्री भी रहे हैं । उत्तर प्रदेश से आते हैं परंतु वे संगठन से नहीं जुड़े हैं इसलिए उनके नाम पर भी केवल चर्चा ही हो सकती है।
निर्मला सीतारमण केंद्रीय वित्त मंत्री हैं महिला के रूप में बड़ा चेहरा है और दक्षिण भारत में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करती हैं। परंतु संगठन से जुड़ाव नहीं होने के चलते नाम केवल चर्चा में ही चलकर रह जाता है उनका आक्रामक स्वभाव भी उनके आगे बढ़ने में अवरोधक है ।
शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को बेहतरीन तरीके से लागू करने वाले एक संजीदा राजनेता के रूप में उनकी पहचान है, संगठन से लंबा जुड़ाव है ।
2014 में नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा के समय इनका नाम नेतृत्व के रूप में चर्चा में रहा था।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के मापदंडों पर खरा उतरते हैं परंतु भारतीय जनता पार्टी को नजदीक से समझने वाले बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी एक केंद्र मानकर काम करने वाला राजनीतिक संगठन है इसलिए दूसरा कोई केंद्र विकसित नहीं हो इसलिए नाम पर विचार करते हुए भी संभावनाएं कम है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना जीवन शुरू करने वाले अधिवक्ता परिषद से जुड़ाव के बाद राजनीति में आने वाले कुशल प्रबंधक माने जाते हैं, वे चुनावी रणनीतिकार है और अमित शाह और नरेंद्र मोदी की पसंद समझ जाते हैं संघ में भी उनकी छवि ठीक है। यादव समाज और पिछड़ा वर्ग में संदेश देने के लिए नाम योग्य है परंतु सरकार में उनकी भूमिका को देखते हुए अभी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की संभावना कम है।
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी तेलंगाना से आते हैं, विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा में सक्रिय रहते हुए अपनी सहज और सरल छवि बनाई है।
2002 में युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने काम किया है, जेपी आंदोलन से जुड़ाव के साथ राजनीति में कदम रखा इन्हें संभावनाओं वाला चेहरा माना जाता है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं, 1996 से मोदी के साथ उनका जुड़ाव है। उनकी ईमानदार छवि के चलते ही हरियाणा में लगातार सरकार बनाने में सफल हो पाए ।
संघ के पूर्व प्रचारक हैं, सभी योग्यताएं पूर्ण करते हैं पर उम्र की अधिकता उन्हें इस जिम्मेदारी से थोड़ा रोकती है परंतु एक संभावनाओं वाला नाम है जिस पर गंभीरता से विचार हुआ है।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उड़ीसा से आते हैं, 2006 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं उससे पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री रहे, वैचारिक निष्ठा, कुशल चुनावी रणनीति भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के स्वीकार्यता के चलते उनका नाम गंभीरता के साथ विचाराधीन है।
सुनील बंसल राजस्थान से आते हैं अभी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री हैं विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में सामाजिक जीवन की शुरुआत करने वाले बंसल उत्तर प्रदेश के संगठन महामंत्री भी रहे हैं। 2014 के चुनाव में उत्तर प्रदेश की भारी जीत में अमित शाह के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में उनकी भूमिका के बाद उनका राजनीतिक जीवन आगे बढ़ा।
विचार की प्रतिबद्धता और केंद्रीय नेतृत्व की पसंद के साथ ही उनका लोकसंग्रही व्यवहार उन्हें संभावनाओं वाला चेहरा बनता है।
इन सब नामों की चर्चा के बीच लगता है
जितने नाम चल रहे हैं उनमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, धर्मेंद्र प्रधान, के नाम गंभीरता लिए हुए दिख रहे हैं।
सुनील बंसल, जी किशन रेड्डी, भूपेंद्र यादव जैसे नाम संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अब तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उत्तर भारत के बाद दक्षिण भारत से भी बंगारू लक्ष्मण, जना कृष्णमूर्ति, वेंकैया नायडू रह चुके है।
नए विचार के रूप में पूर्व को साधने के लिए उड़ीसा की ओर विचार किए जाने की संभावना है। अगर दक्षिण भारतीय नेता को जिम्मेदारी सौंपने पर विचार किया जाता है तो जी किशन रेड्डी गंभीर दावेदार माने जाते हैं, उत्तर भारत से फिर मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।







Good analysis