भाजपा में आएगा “शिव”राज….?

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जोरों पर हैं। हाल ही में उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के नए मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ ली, लेकिन अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं।

नई दिल्ली। शिवराज सिंह चौहान भाजपा के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। उन्होंने चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और हाल ही में विदिशा से छठी बार सांसद चुने गए। वे जमीनी स्तर से जुड़े नेता माने जाते हैं, और उनकी नीतियों ने भाजपा को मध्य प्रदेश में लंबे समय तक सत्ता में बनाए रखने में मदद की।

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व शिवराज की संगठनात्मक क्षमता और व्यापक जन समर्थन को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त मान सकता है। इसके अलावा, ओबीसी समुदाय से आने के कारण वे भाजपा के सामाजिक संतुलन के लिहाज से भी एक मजबूत विकल्प माने जा रहे हैं।

राजनीतिक जीवन

  1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से शुरुआत – शिवराज सिंह चौहान ने 1972 में RSS जॉइन किया और आपातकाल (1975-77) के दौरान जेल भी गए।
  2. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) – 1977-1980 तक वे मध्य प्रदेश ABVP के संयुक्त सचिव रहे और 1980-82 में प्रदेश महासचिव बने।
  3. भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) – 1984-85 में भाजपा युवा मोर्चा के संयुक्त सचिव और 1988-91 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। 2000 से 2003 तक भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।
  4. पहली बार विधायक और सांसद – 1990 में पहली बार बुधनी से विधायक बने और 1991 में विदिशा से पहली बार लोकसभा सांसद बने।
  5. लगातार सांसद जीत – 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में विदिशा से लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए।
  6. मुख्यमंत्री कार्यकाल – 2005 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 16.5 वर्षों तक इस पद पर रहे।
  7. राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता कद – 2019 में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने और सदस्यता अभियान के प्रमुख भी रहे। 2024 में विदिशा से छठी बार सांसद चुने गए।
  8. संघ से गहरे संबंध – शिवराज सिंह चौहान का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से गहरा नाता रहा है और वे हमेशा संघ के अनुशासन और विचारधारा के प्रति समर्पित रहे हैं।

क्या होंगे संभावित कारण?

  1. लंबा प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव – शिवराज भाजपा युवा मोर्चा से लेकर मुख्यमंत्री पद तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
  2. ओबीसी चेहरा – भाजपा के लिए ओबीसी समुदाय का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है, और शिवराज सिंह इस वर्ग से आते हैं।
  3. लोकप्रियता और जमीनी पकड़ – शिवराज की योजनाएं जैसे ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ और ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन’ देशभर में लोकप्रिय रही हैं।
  4. मोदी-शाह के भरोसेमंद नेता – पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी नजदीकी और भरोसेमंद छवि भी उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।
  5. संघ से मजबूत संबंध – शिवराज सिंह चौहान संघ के सिद्धांतों और अनुशासन के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहे हैं, जिससे वे संगठन में एक मजबूत स्थान रखते हैं।

संभावित चुनौतियां

हालांकि शिवराज सिंह चौहान का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में है, लेकिन इसके लिए उन्हें अन्य वरिष्ठ नेताओं से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। इसके अलावा, यह भी देखा जाना बाकी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह किसे इस पद के लिए उपयुक्त मानते हैं।

भविष्य की संभावनाएं

यदि शिवराज सिंह चौहान को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह स्पष्ट होगा कि पार्टी आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उनके अनुभव और लोकप्रियता का लाभ उठाना चाहती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व इस अहम पद के लिए किसे चुनता है

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📌 स्रोत:

ojasvinews52@gmail.com

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