नवरात्र विचार -२

नवरात्र के 9 दिन,शक्ति के आह्वान के,अपने सामर्थ्य के आत्म अवलोकन के 9 दिन, शक्ति के नियोजन के लिए 9 दिन और नौ शक्तियों को एकमेव करने के 9 दिन ।

ब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती है[। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है।


नवरात्र के 9 दिन,शक्ति के आह्वान के,अपने सामर्थ्य के आत्म अवलोकन के 9 दिन, शक्ति के नियोजन के लिए 9 दिन और नौ शक्तियों को एकमेव करने के 9 दिन ।
मेरा मानना है कि नवरात्र के 9 दिन हमें नौ शक्तियों के आत्मावलोकन,विवेचन और शक्ति को बढ़ाने के लिए मिलते है। इसे एक अवसर के रूप में लेना चाहिए।
मेरा मानना है पहली शक्ति के रूप में -व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्षम हो -व्यक्ति शारीरिक रूप से,आरोग्य से परिपूर्ण हो,किसी भी प्रकार के घात-प्रतिघातों का मुकाबला करने में समर्थ हो।
दूसरी शक्ति के रूप में व्यक्ति मानसिक-बौद्धिक रूप से सक्षम हो- व्यक्ति बुद्धिमान,विवेकशील हो ताकि परिस्थितियों का मुकाबला करने का साहस उसमें हो,सटीक निर्णय कर सके और बाहरी-भीतरी शत्रुओं को समझ सके।
तीसरी शक्ति के रूप में पारिवारिक एकता, समझ और सामंजस्य की ताकत – पारिवारिक ऐक्य भाव व्यक्ति को मजबूत बनाते है,उनका आपसी सामंजस्य उन्हें बलिष्ठ बनाता है ( 100 नहीं 105 है का भाव ) इसलिए पारिवारिक एकजुटता शक्ति का एक अहम केंद्र है।
चौथी शक्ति के रूप में आर्थिक रूप से सक्षम हो – आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति, समर्थ समाज का आधार बनता है इसलिए जीविकोपार्जन के सभी वैधानिक रास्तों से धनार्जन करने में समर्थ बने. स्वयं भी और परिवार को भी उससे जोड़े, आर्थिक रूप से सम्पन्न व्यक्ति,सम्पन्न परिवार की बुनियाद रखता है जो अंततोगत्वा आर्थिक रूप से समर्थ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देता है।
पांचवीं शक्ति के रूप में समर्थ समाज रचना- समर्थ समाज सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करता है,शक्ति संम्पन्न, एकजुट समाज उस सिंह के समान है जिसकी बलि कोई नहीं देता,अन्यथा बकरें की बलि तो हर कोई दे देता है।
छठी शक्ति अपनी संस्कृति और समाज के मान बिंदुओं की रक्षा करने का सामर्थ्य- जब व्यक्ति और परिवार-समाज समर्थ और संगठित होगा तो स्वभाविक रूप से अपनी संस्कृति और मन बिंदुओं की रक्षा करने का सामर्थ्य रख सकेगा( इजरायल इसका उदाहरण है)

सातवीं शक्ति के रूप में राजनीतिक सामर्थ्य – समाज का ऐक्य भाव उसे समर्थ बनाता है,उसे राजनैतिक रूप से सामर्थ्य उसकी प्रगति,विकास का मार्ग प्रशस्त करता है ( अमेरिकी समाज इसका सशक्त उदाहरण है)
आठवीं शक्ति के रूप में अपने आध्यात्मिक शक्ति- व्यक्ति अपने आध्यात्मिक विचारों को अपने अंदर मजबूती से रखने, उन्हें बिना किसी बाहरी व्यवधान के पालन करने में समर्थ हो।
नवमी शक्ति के रूप में शैक्षणिक सामर्थ्य- व्यक्ति युगानुकूल, देशनुकूल शैक्षणिक योग्यता अर्जित कर शिक्षा की दृष्टि से समर्थ हो ताकि प्रतिस्पर्धा के इस युग में नहीं पिछड़े।
इस नवरात्रा अपनी 9 शक्तियों का सामर्थ्य टटोलें,देखें….म्यांमार से भगाए गए रोहिंग्या उस कश्मीर घाटी में जाकर बस गए,राशनकार्ड बनाने में सफल हो गए जहां भारतीय फौज का जवान अपनी जान तो दे सकता है पर एक इंच भूमि नहीं ले सकता था,वहां के 10,00,000 से ज्यादा कश्मीरी पंडित 90 के दशक से शरणार्थी शिविरों में बदत्तर जीवन जीने को मजबूर हो गए क्योंकि समाज भावातिरेक था औऱ आसन्न संकट को समझ नहीं पाया।
जब समाज ने सामुहिक चिंतन किया तो परिणाम सामने आ रहे है,घाटी फिर से मंदिरों की शंख-घण्टी की आवाज सुनेगी….
विचार कीजियेगा….इन 9 शक्तियों का सामंजस्य ही समर्थ बनाता है व्यक्ति को,स्वयं व्यक्ति का सामर्थ्य क्षणिक आनंद तो दे सकता है पर दूरगामी रूप से सामाजिक सामर्थ्य ही उसे सक्षम बनाता है।

चैत्र नवरात्र २०८२
द्वितीय नवरात्र

ojasvinews52@gmail.com

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