तहव्वुर राणा से जुड़ी जांच में यह जानकारी सामने आई है कि अमेरिका से साझा किए गए दस्तावेजों में यह रहस्यमयी शख्स दुबई में राणा से मिला था। एजेंसियों को शक है कि वह व्यक्ति ISI, पाकिस्तानी सेना या किसी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
नई दिल्ली:
2008 के मुंबई आतंकी हमलों की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को ‘दुबई मैन’ नामक एक रहस्यमयी व्यक्ति की जानकारी मिली है, जो कथित तौर पर हमले की पूरी योजना से पहले ही अवगत था।
🔍 कौन है ‘दुबई मैन’?
तहव्वुर राणा से जुड़ी जांच में यह जानकारी सामने आई है कि अमेरिका से साझा किए गए दस्तावेजों में यह रहस्यमयी शख्स दुबई में राणा से मिला था। एजेंसियों को शक है कि वह व्यक्ति ISI, पाकिस्तानी सेना या किसी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
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🧩 हेडली और राणा की मिलीभगत
डेविड हेडली उर्फ दाऊद गिलानी, जिसने मुंबई हमलों की साजिश में बड़ी भूमिका निभाई थी, ने राणा को भारत न जाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने दुबई में ही उस संदिग्ध व्यक्ति से राणा की मुलाकात करवाई थी, जिसने हमले की जानकारी दी थी।
🏢 मुंबई ऑफिस और रेकी
राणा और हेडली ने मुंबई स्थित इमीग्रेशन ऑफिस की लीज़ रिन्यू नहीं की थी, जो हमलों की रेकी (सर्वेक्षण) में इस्तेमाल हुआ था।
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🗺️ भारत में संदिग्ध यात्राएं
राणा और उनकी पत्नी समरज़ राणा अख्तर ने 13-21 नवंबर 2008 के बीच दिल्ली, आगरा, हापुड़, कोच्चि, अहमदाबाद और मुंबई का दौरा किया। NIA जाँच कर रही है कि क्या ये यात्राएं भी हमलों से पहले की रेकी का हिस्सा थीं।
👥 प्रमुख साजिशकर्ता
इस हमले से जुड़े कुछ नाम:
- हाफिज सईद
- ज़की-उर-रहमान लखवी
- साजिद मजीद, इलियास कश्मीरी, मेजर अब्दुर रहमान (पाशा)
- ISI के अधिकारी: मेजर इक़बाल और समीर अली
🚨 तहव्वुर राणा की सुरक्षा
उसे CGO कॉम्प्लेक्स, दिल्ली स्थित NIA मुख्यालय में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। 24×7 निगरानी, मेडिकल चेकअप और सीमित संसाधनों के साथ।
✈️ गुप्त मिशन से भारत आगमन
उसे अमेरिका से Gulfstream G550 विमान द्वारा भारत लाया गया, जिसमें पाकिस्तान की वायुसीमा से बचते हुए उड़ान भरी गई। यह कदम भारत-अमेरिका सहयोग के तहत संभव हुआ।
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⚖️ कोर्ट में पेशी
उसे दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में विशेष NIA जज के सामने पेश किया गया, जहां उसे 18 दिनों की हिरासत में भेजा गया। राणा ने पूछा, “क्या एक साल में मुकदमा खत्म होगा?” — जवाब “नहीं” सुनकर वह निराश दिखा।
🤝 भारत-अमेरिका सहयोग
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का आभार जताया। यह कदम 26/11 के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा साबित हो सकता है।
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