प्रेरक व्यक्तित्व महारानी अहिल्याबाई होल्कर

Spread the love


महारानी अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 ईस्वी में चंदवाड (चाउंडी )अहमदनगर महाराष्ट्र में अत्यंत साधारण किसान श्री मानको जी शिंदे के यहां हुआ आपकी माता का नाम सुशीला शिंदे था।
जिस प्रकार छोटे से बीज में विशाल वट वृक्ष छिपा होता है उसी प्रकार बालिका अहिल्याबाई में भी अनेक को गुण छिपे थे, जिन्हें इतिहास प्रसिद्ध महान मराठा सूबेदार मल्हार राव होलकर जी ने पहचान लिया और अपने पुत्र खांडेराव से अहिल्याबाई के विवाह का प्रस्ताव भेजा जिसे मानको जी ने अपना सौभाग्य समझ कर स्वीकार कर लिया सन् 1733 में 10 वर्ष की आयु में आपका विवाह हो गया इस विवाह में महान पेशवा बाजीराव प्रथम स्वयं आशीर्वाद देने उपस्थित हुए थे।
सन् 1745 में आपने एक पुत्र मालेराव को जन्म दिया
2 वर्ष बाद एक पुत्री मुक्ता बाई का भी जन्म हुआ।
कठिनाइयां मनुष्य को महान बनाती हैं
सन् 1754 में कुम्हेर के युद्ध में खंडेराव वीरगति को प्राप्त हो गए और मात्र 21 वर्ष की आयु में ही अहिल्याबाई विधवा हो गई वे सती होना चाहती थी पर उनके पिता समान ससुर ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया राज्य की व्यवस्था संभालने के लिए उन्हें सैनिक शिक्षा भी दी लेकिन सन 1766 ईस्वी में मल्हार राव भी स्वर्गवासी हो गई अल्पायु के माले राव कि अभिभावक के रूप में अपने मालवा प्रांत के शासन की जिम्मेदारी संभाली किंतु उनके युवा पुत्र का 1767 में देहांत हो गया।
जीवन की इतनी कठिन चुनौतियों के बाद भी अपने न केवल स्वयं को अपितु पूरे मालवा प्रांत को जो मध्यप्रदेश प्रदेश से पंजाब तक था का शासन इस प्रकार संभाल कि वे प्रजा की मां ही बन गई।
पुत्र को ही सुनाया मृत्युदंड
पुत्र माले राव के रथ से टकराकर एक बछड़े की मृत्यु हो गई गौ माता वही उसके दुख में बैठी रही थोड़ी देर बाद अहिल्याबाई उधर से गुजरी उन्होंने पता लगाया यह कैसे हुआ राजवाड़ा जाकर इन्होंने अपनी पुत्रवधू से पूछा यदि किसी मां के सामने उसके पुत्र की कोई हत्या कर दे तो क्या दंड देना चाहिए बहू ने कहा मृत्युदंड इस पर उन्होंने बेझिझक अपने पुत्र को हाथ पैर बांधकर रथ से घसीट कर मृत्यु दंड देने का कठोर फैसला सुना दिया जब कोई रथ चलने को तैयार नहीं हुआ तो स्वयं ने रथ चलाया कहते हैं उसी गौ माता ने आकर उनका रास्ता रोक दिया इंदौर का आड़ा बाजार इस घटना की याद में बना हुआ है।
महिलाओं को दिए अधिकार
उन दिनों यह राज्य का कानून था कि यदि कोई पुरुष बिना पुत्र के ही मृत्यु को प्राप्त होता है तो उसकी समस्त संपत्ति राज्य जप्त कर लेता था उसकी विधवा का उस संपत्ति पर अधिकार नहीं होता था अहिल्याबाई ने मालवा प्रांत की शासक के रूप में इस कानून को बदल दिया और विधवाओं को संपत्ति में अधिकार दिया जिससे वह अपना जीवन आसानी से चला पाएं।
महिला स्वावलंबन
महारानी अहिल्याबाई ने महेश्वर तीर्थ में महिलाओं को रेशमी व सूती साड़ियों के निर्माण का प्रशिक्षण केंद्र खुलवाया और उन साड़ियों के विक्रय की व्यवस्था की यह उसे जमाने में महान कार्य था यह साड़ियां आज भी बनती हैं और बिकती हैं।
महान निर्माता
अहिल्याबाई कुशल प्रशासक और समाजसेवी ही नहीं थी बल्कि महान निर्माता भी थी उन्होंने इंदौर नामक छोटे से गांव को विकसित शहर बना दिया ।
उन्होंने विदेशी आक्रांताओं द्वारा तोड़े गई अनेकों मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया जिनमें निम्न प्रमुख हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर सोमनाथ मंदिर, विष्णु पद मंदिर गया बिहार, बैजनाथ मंदिर कांगड़ा हिमाचल प्रदेश, एलोरा गणेश्वर मंदिर ,उज्जैन चिंतामन गणेश मंदिर, वैद्यनाथ मंदिर श्रीशैल, सुपलेश्वर मंदिर, मंडलेश्वर मंदिर नीलकंठ महादेव मंदिर मांडू व काशी से कोलकाता तक सड़क निर्माण
जैसे महान निर्माण कार्य उनके द्वारा किए गए।
अहिल्याबाई भारतीय संस्कृति की मूर्तिमान प्रतिबिंब थी इतनी आपत्तियों के प्रसंग तथा कठिनाइयां उनके जीवन में आए लेकिन उन सबका बड़े धैर्य व धर्म से मुकाबला कर उन्होंने राज्य व प्रजा को सुरक्षित रखा यही उन्हें विशेष बनता है उन्होंने भारतीय परंपराएं पुर्नजागृत की भारतीय संस्कृति जब तक विद्यमान है तब तक अहिल्याबाई से प्रेरणा लेती रहेगी।

  • ojasvinews52@gmail.com

    News & Analysis all you want to know in new perspective

    Related Posts

    ऑपरेशन ‘तीस्ता प्रहार’ चीन-पाक की हलचलों के बीच भारतीय सेना का रणनीतिक युद्ध अभ्यास

    Spread the love

    Spread the loveबांग्लादेश में बन रहा एयरबेस: चीन और पाकिस्तान की भूमिका 🔰 भारतीय सेना का ‘तीस्ता प्रहार’ युद्धाभ्यास भारतीय सेना ने हाल ही में उत्तर बंगाल के नदी और…

    ” मोदी का ऐलान: ‘धरती के आखिरी कोने तक आतंकियों का पीछा करेंगे, मिलेगी सज़ा’”

    Spread the love

    Spread the love“जो लोग परछाई में बैठकर साजिश रचते हैं, वे भी बख्शे नहीं जाएंगे। यह नया भारत है – हम पलटवार करते हैं।” मधुबनी, बिहार | 24 अप्रैल 2025…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *